VICHAR ( विचार) 25

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  नोटः- अच्छे विचार हमें हमेशा ही प्रेरणा देते हैं यह विचार किसी महान संत या किसी राजनेता या किसी महान व्यक्ति के हो सकते हैं हम उनको इन महान विचारों के लिए हृदय से धन्यवाद देते हैं कि इन विचारों से उन्होंने हमें सदैव प्रेरित ही किया है आइए उन्हीं विचारों का हम एक संग्रह देखें और उन्हें अपने जीवन में उतार कर इस जीवन को महान बनाएं                         🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷                   *लेने के नहीं*              *देने के योग्य बनीये*               *🙏सुप्रभात 🙏*       *🙏आपका दिन शुभ हो 🙏*      🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷           *किसी को तोड़कर नहीं*                             *अपितु*              *जोड़कर मजबूत बने*         ...

KABIR ( संत कबीर )

संत कबीर को भारत के सबसे महान कवियों में से एक होने के साथ-साथ रहस्यवादी भी माना जाता है उन की प्रमुख रचनायें बीजक, साखी ग्रंथ, कबीर ग्रंथावली और अनुराग सागर हैं। वह निडर और बहादुर समाज सुधारक थे। उन्होंने अपनी रचना आम लोगों की बोली में रची।
संत कबीर को समझना बहुत मुश्किल है परंतु यदि प्रेम से और भक्ति से समझा जाए तो बहुत आसान है और इसके लिए एक सच्चे गुरु की आवश्यकता होती है बिना गुरु के ईश्वर के समीप जाना बहुत मुश्किल है
एक सच्चा गुरु आपको इस भवसागर से पार ले जा सकता है बहुत आसानी से 
इसलिए एक सच्चे गुरु की तलाश करके उनकी शरण में जाना चाहिए 
इन दोहो की बारीकी को वही खोल सकता है या जान सकता है जिसे परमात्मा का ज्ञान हो या जिस ने कबीर को जान लिया हो हम तो सिर्फ कोशिश कर सकते हैं जय कबीर

अटपट चाल कबीर की झटपट लखी न जाए
जो झटपट लख जाए तो सब खटपट मिट जाए
सचमुच संत कबीर का नाम बड़े ही आदर और सम्मान पूर्वक लिया जाता है हम भी उनको नमन करते हुए उनके कुछ दोहे प्रस्तुत कर रहे हैं कुछ त्रुटि हो तो क्षमा करें
इन दोहों के भीतर छिपे भेद को जानने के लिए देखिए यूट्यूब पर कहत कबीर सुनो भाई साधो चैनल पर नितिन दास जी के सत्संग में 
https://youtu.be/LdbpNp1CTRU

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कबीर सुता क्या करे, जागी न जपे मुरारी ।
एक दिन तू भी सोवेगा, लम्बे पाँव पसारी ।

अर्थात:- कबीर कहते हैं लोग अज्ञान की नींद में सोए रहते हे ज्ञान की जागृति को हासिल कर प्रभु का नाम क्यो नहीं लेते  एकाग्रचित्त होकर प्रभु का ध्यान करे वह दिन दूर नहीं जब हमें गहरी निद्रा में सो जाना है जब हम जाग सकते हे तो जागते क्यों नहीं? प्रभु का नाम स्मरण क्यों नहीं करते ? 
इसलिए हमें अपने विवेक का उपयोग करके शेष समय ईश्वर भक्ति में लगाना चाहिये

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हमें संतों का सम्मान करना चाहिए क्योंकि वह समाज को सुधारने के लिए उनमें जितना ज्ञान है जितनी बुद्धि है वह किसी ना किसी रूप में उस समाज को अपने सामर्थ्य के अनुसार सुधार कर ही रहा है अतः हमें किसी का बुरा न मानते हुए उनका सम्मान करना चाहिए इसीलिए इस दोहे को प्रस्तुत किया गया है
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ईश्वर परमात्मा को पाना वास्तव में इतना सरल नहीं है इसके लिए विषय विकार लोभ मोह माया और बहुत कुछ तजना पड़ता है 
और मोह माया को छोड़ना इतना सरल और आसान नहीं है इसलिए कबीर दास जी ने इस मार्ग को लंबा दूर और विकट बताया है

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ईश्वर को पाने के लिए लोग क्या क्या करते हैं घर बार छोड़ते हैं जंगलों में जाते हैं व्रत करते हैं तीरथ जाते हैं 
आंख बंद करके ध्यान करते हैं कान बंद करके नाद सुनते हैं
जबकि उस परमात्मा को सिर्फ विश्वास से बिना आंख बंद करें कान को रूधे प्राप्त किया जा सकता है
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आंखो देखा घी भला, ना मुख मेला तेल
साधु सोन झगरा भला, ना साकुत सोन मेल।

अर्थात:- धी देखने मात्र से ही अच्छा लगता है पर तेल मुॅुह में डालने पर भी अच्छा नहीं लगता है।
संतो से झगड़ा भी अच्छा है पर दुष्टों से मेल-मिलाप मित्रता भी अच्छा नहीं है।

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टेक करै सो बाबरा, टेकै होबै हानि
जो टेकै साहिब मिलै, सोई टेक परमानि

जिद करना मूर्खता है। जिद करने से नुकसान होता है।
जिस जिद से परमात्मा की प्राप्ति हो वही जिद उत्तम हैइसलिए हमें प्रभु प्राप्ति के लिए हमेशा जिद करते रहना चाहिए प्रयत्न करते रहना चाहिए

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आशा तजि माया तजी मोह तजी और मन
हरख,शोक निंदा तजइ कहै कबीर संत जान

अर्थात:- जो व्यक्ति आशा, माया और मोह को त्याग देता है
तथा जिसने सुख, शोक निन्दा का परित्याग कर दिया है
कबीर के कथाअनुसार वही सत्य मार्ग पर है और वही व्यक्ति मुझ तक पहुंच सकता है
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शब्द शब्द सब कोई कहे वह तो शब्द विदेह
जिह्वा पर आवे नहीं निरखी परखि करि लेह

अर्थात:- दुनिया में ईश्वर के इतने नाम हैं कोटि नाम है कई प्रकार के नाम है जिन्हें जपने से हमारा उद्धार नहीं हो सकता क्योंकि वह शब्द हमारी जुबान पर नहीं आता है तो वह 52 अक्षर का शब्द कैसे हो सकता है इसको समझने के लिए तो सच्चे गुरु की शरण में जाना ही पड़ेगा और सोच समझकर नाम लेना पड़ेगा जय हो कबीर परमेश्वर की

कबीर दास जी के कथन और वाणी मे इतनेे गुप्त रहस्य हैं जिन्हेंं समझना सचमुच कठिन हो जाता है इसके लिए  हमें  सच्चे गुरु की आवश्यकता होती है 

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जा घट प्रेम न संचरै, सो घट जान मसान।
जैसे खाल लोहार की , साँस लेत बिनु प्राण

अर्थातः-  हर मनुष्य के अंदर ईश्वर का निवास है यहां घट मतलब  मनुष्य और जिस घट में उस परमपिता परमेश्वर के लिए कोई प्रेम नहीं है अर्थात जो उसे याद नहीं करता है वह घट शमशान की तरह है जिसकी तुलना कबीर दास जी ने लोहार की उस खाल को बताया है जिससे वह हवा देकर अंगारों को जलाता है यदि हम ईश्वर को याद नहीं करते हैं तो हमारा जीना भी व्यर्थ है जैसे लोहार की खाल

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शब्द निरन्तर से मन लागा, मलिन वासना त्यागी।
ऊठत बैठत कबहूं न छूटै, ऐसी तारी लागी।।

एक बार एक क्षण जब उस परमात्मा का एहसास हो जाता है तो फिर यह दुनिया बेगानी हो जाते हैं मन के सारे मेल समाप्त हो जाते हैं 
उठते बैठते सोते जागते सिर्फ उसी पल और उसी क्षण को पाने के लिए आदमी मस्त हो जाता हें

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मर जाऊं मांगू नहीं अपने तन के काज !
और परमार्थ के काज में मोहे ना आए लाज

कबीर दास जी ने मांगने को मरने के समान बताया परंतु यदि किसी का भला करना हो इस समाज को ईश्वर के प्रति जागरूक करना हो तो ऐसे मांगने में लाज नहीं आनी चाहिए

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घट घट मेरा साइयां सुनी सहज ना कोई
बलिहारी वाह घट के जिस घट प्रगट होई

घट यानी शरीर इस लोक में ऐसा कोई शरीर नहीं है जहां उस परमात्मा का निवास ना हो ऐसी कोई सहज नहीं है जो सुनी हो
बस अगर देरी है तो उस परमात्मा की कृपा की है जो उस घट मैं प्रकट हो जाता उस को कोटि-कोटि प्रणाम

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कामी क्रोधी लालची,  इनसे भक्ति न होय 

भक्ति करे कोई सुरमा, जाति बरन कुल खोय 

कबीर दास जी कहते हैं कि जो व्यक्ति कामी होगा क्रोधी होगा और लालची होगा अर्थात विकारों से भरा होगा उस व्यक्ति को परमात्मा मिलना सहज नहीं होता वास्तव में भक्ति उसके ही पास में है जो इन विषय विकारों से ऊपर उठकर जाति धर्म इन से परे होकर भक्ति करता है वही वास्तविक सूरमा है सहासी है परमात्मा उसको ही प्राप्त होता है

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कबीर यह संसार है, जैसा सेमल फूल |

दिन दस के व्येवहार में, झूठे रंग न भूल|

कबीर दास जी कहते हैं कि इस संसार की सभी माया सेमल के फूल की भांति केवल दिखावा मात्र है  
अतः  जीवन के झूठे रंगों को दस दिनों के व्यवहार एवं चहल - पहल में मत भूलो 

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रात गँवाई सोयेकर, दिवस गँवाये खाये |

हीरा जनम अमोल था, कौड़ी बदले जाय

 हम इस अनमोल जीवन को सांसारिक सुखों में व्यतीत कर रहे हैं और असली सुख को भूल रहे हैं
यह जीवन पल पल व्यतीत हो रहा है जैसे हाथ से रेत फिसलती है इस अनमोल जीवन को बर्बाद ना करें अति शीघ्र उस परमात्मा की खोज करनी चाहिए जिसके लिए हमारा जन्म हुआ है और इसके लिए एक सच्चे गुरु की तलाश करके अपने जीवन का उद्धार करना चाहिए

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जाप मरे अजपा मरे अनहद भी मर जाए
 सुरत समाये शब्द में वाको काल न खाएं

अर्थ :- यह वाणी बहुत ही गहरी वाणी है और विवेकी वाणी मैंने नितिन दास जी के मुख से इसके बारे में जाना है अर्थात कबीर दास जी ने जाप अजपा और अनहद इन तीनों को ही एक सिरे से नकार दिया है अर्थात इन तीनों विधि से परमात्मा प्राप्त नहीं हो सकता इसलिए हमें अपनी सुरती को उस शब्द में लगाकर परमात्मा को प्राप्त  कर सकते है और इसका लखाव एक सच्चा गुरु ही कर सकता है और अधिक जानने के लिए नितिन दास जी के सत्संग सुन सकते हैं कहत कबीर सुनो भाई साधो पर

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इस तन का दीवा करों, बाती मेल्यूं जीव।

लोही सींचौं तेल ज्यूं, कब मुख देखों पीव।

इस शरीर को दीपक बना कर, उसमें प्राणों की बत्ती डाल कर और रक्त से तेल की तरह सींच कर – इस तरह दीपक जला कर मैं अपने प्रिय  परमात्मा के मुख का दर्शन कब कर पाऊंगा?  ईश्वर से लौ लगाना उसे पाने की चाह करना उसकी भक्ति में तन-मन को लगाना एक साधना है तपस्या है  जिसे कोई कोई विरला ही कर पाता है इसलिए हमें अति शीघ्र एक सच्चे गुरु की तलाश करके उस परमात्मा को पाने की लो जला लेना चाहिए

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खोद खाद धरती सहै, काट कूट बनराय |कुटिल वचन साधु सहै, और से सहा न जाय ||


पृथ्वी, वन और साधु इन तीनों में सहन शक्ति होती है जो और किसी में मिलना संभव नहीं है कटु वचन सन्त सहते हैं, किसी और से सहा नहीं जा सकता | इन तीनों में संत को ही महान बताया है क्योंकि वह सब कुछ सह कर परमात्मा के निकट होता है

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आस - पास जोधा खड़े, सबै बजावै गाल 
मंझ महल सेले चला, ऐसा परबल काल 

व्यक्ती कितना भी ताकतवर हो उसके पास कितना भी ऐश्वर्य हो
आस - पास में शूरवीर खड़े सब डींगे मारते रह जायेंगे जब काल आयेगा तो  उसे इन सब ऐश्वर्य महलों के बीच में से पकड़कर ले जायेगा, और सब हाथ मलते  रह जायेंगे काल ऐसा प्रबल है 
इसलिए सब अंहकार छोड़ कर तुम ईश्वर भक्ति में लग जाओ

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या दुनिया में आय के, छाड़ि दे तू ऐंठ
लेना होय सो लेइ ले, उठी जात है पैंठ 

इस संसार में आकर हम यह समझते हैं  कि यह  धन,माया, शोहरत, ऐश्वर्य सब हमारा है यह समझना ही मानव कि सबसे बड़ी भूल है अभिमान है
हमें  सभी प्रकार के अभिमान को छोड़कर भक्ति और प्रेम से इस संसार रूपी बाजार से जो खरीदना हे खरीद लेना चाहिए, पता नहीं  यह शरीर बाजार कब उठ जाये 

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नाम अखंड और सब खंडा
सार शब्द गरजे ब्रह्मंडा

केवल परमात्मा का नाम संसार में सच्चा है जो कभी नहीं मरता आदि अनादि काल से निरंतर है और आगे भी रहेगा
शेष सभी नाम खंडित है अर्थात उनका कोई अर्थ नहीं है इस संसार में अक्षरों द्वारा दिए गए सभी नाम हम मनुष्य के द्वारा प्रकट किए गए हैं यानी उनका कोई अर्थ नहीं है
सार शब्द जो निरंतर इस ब्रह्मांड में गूंज रहा है जो पहले भी था आज भी है और कल भी रहेगा उस शब्द उस अखंड नाम के बारे में कोई बिरला व्यक्ति ही जानता है इसलिए हमें उस सच्चे गुरु की तलाश करके उस नाम को जानना चाहिए और अपना उद्धार करना चाहिए

Comments

  1. जय हो कबीर दास जी की

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  2. संत रामपाल दासजी ने संपूर्ण रहस्य खोल दिया हैअब कोई संशय बाकी नहीं है ।।

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    1. 🙏 मालिक सब पर दया करें

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  3. जिसने कबीर साहब के अटपटे वचन समझ लिए समझो उसकी नैया पार हो गई लेकिन उसके लिए सच्चे गुरु की तलाश करनी चाहिए। साहिब बंदगी सत्यनाम।

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  4. Replies
    1. 🙏 जय हो सदा ही जय हो

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  5. Saheb bandgi 🙏🙏🙏🙏

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